भजन सम्राट नरेंद्र चंचल का आज 80 साल की उम्र में निधन हो गया।  नरेंद्र चंचल ने अपने सर्वप्रिय विहार स्थित घर में आखिरी सांस ली. वह पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। आपकों बतां दें कि भजन गायन की दुनिया में नरेंद्र चंचल लोगों के काफी प्रिय गायक रहे हैं। माता की भेंटों के साथ उन्होंने बाॅलीवुड में कई गाने गए। आपकों बतां दें कि एक ऐसा समय भी आया था जब नरेंद्र चंचल की आवाज चली गई थी और यह काफी दर्दनाक सफर रहा।

नरेंद्र चंचल का जन्म पंजाब के अमृतसर की नमक मंडी में 16 अक्टूबर 1940 को हुआ था. वह धार्मिक पंजाबी परिवार से थे और धार्मिक वातावरण में पले बढ़े थे.  उन्हें बचपन से ही भजन और आरती में दिलचस्पी थी और इसीलिए उन्होंने छोटी उम्र में जगरातों में गाना शुरू कर दिया था.  


कई सालों तक स्ट्रगल करने के बाद उन्होंने राज कपूर के निर्देशन में बनी ऋषि कपूर और डिंपल कपाडिया स्टारर फिल्म बॉबी में अपना पहला गाना गाया था. यह गाना था- बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो. इस गाने ने उन्हें बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलवाया था। 


इसके साथ ही उन्हें यूएस के जॉर्जिया स्टेट की सिटीजनशिप भी मिली हुई थी.  फिल्म बॉबी में सफलता मिलने के बाद स्टारडम नरेंद्र चंचल के सिर चढ़कर बोलने लगा था. एक इंटरव्यू के दौरान नरेंद्र चंचल ने बताया था कि कैसे उन्होंने फिल्म में हिट होने के बाद जगरातों में गाना छोड़ दिया था. हालांकि इस बात की सजा भी उन्हें मिली. उन्होंने बताया कि मैं काली मां के मंदिर में गया था और वहां मुझे गाने के लिए बोला गया लेकिन मैंने झूठ बोल दिया कि मेरी तबियत ठीक नहीं है. घर आकर मुझे समझ आया कि मेरी आवाज ही नहीं निकला रही है।


उन्होंने आगे कहा कि मैं परेशान हो गया और कुछ समय बाद उसी मंदिर में गया. वहां लोगों ने मुझे पूछा कि तुम्हारी तो तबीयत ठीक नहीं थी. इसपर उन्होंने माफी मांगी. उस समय मंदिर में यज्ञ हो रहा है था और वहां पेड़े की बनी लस्सी मिलती थी, जिसे उन्होंने मुझे पीने के लिए दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद नरेंद्र की आवज वापस आई और उन्होंने प्रण लिया कि वह कभी माता के भजन गाने से पीछे नहीं हटेंगे. 2 महीने तक आवाज बंद रहने की सजा के बाद से अगर नरेंद्र चंचल बीमार भी होते थे तो सिर्फ जगराते का हिस्सा बनने और जय माता दी बोलने के लिए चले जाया करते थे।


वैसे फिल्म बॉबी के अलावा उन्होंने फिल्म बेनाम में मैं बेनाम हो गया, रोटी कपड़ा और मकान में बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई, फिल्म आशा में तूने मुझे बुलाया, फिल्म अवतार के लिए चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है, काला सूरज फिल्म के लिए दो घुट पीला दे साकिया और फिल्म अनजाने के लिए हुए हैं वो हमसे  कुछ ऐसे पराए, जैसे गानों और भजनों को गाया था. 


जिस भजन ने नरेंद्र चंचल को रातों रात मशहूर बनाया था वो ‘चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है’. इस भजन को नरेंद्र ने आशा भोसले और महेंद्र कपूर के साथ  गाया था। नरेंद्र ने Midnight Singer के नाम से अपनी ऑटोबायोग्राफी रिलीज की थी. इसमें उनकी जिंदगी, स्ट्रगल, मेहनत के किस्से और सफलता के बारे में बताया गया था।