विश्व पर्यावरण दिवस पर जाने कैसे महिलाओं के स्वभाव में है प्रकृति को बचाना

दुनिया का ऐसा कोई भी काम नहीं है जो महिलाएं नहीं कर सकती, चाहे बच्चे को पालना हो या फिर प्रकृति को लेकर अपना योगदान देना. किसी भी पुरुष से ज्यादा आपने देखा होगा पानी बचाने से लेकर पेड़-पौधे लगाने तक महिलाएं प्रकृति से ज्यादा जुड़ी होती हैं. अपने अपने इतिहास में देखा है, जब भी प्रकृति को बचाने की बात आई तो महिलाओं ने भी अपनी जान दांव पर लगाया है. पर्यावरण को लेकर महिलाएं हमेशा से सजग रही हैं.

कृषि का एक बड़ा हिस्सा है महिलाएं

जब आप कभी खेतों का मुआयना करेंगे तो पाएंगे कि पुरुषों के साथ ही महिलाओं की एक बड़ी संख्या भी खेत पर काम कर रही है. जहां पुरुष मुख्य तौर पर हल चलाने और भारी कामों को करने में योगदान देते हैं, वहीं महिलाएं को ज्यादातर बुआई और कटाई करते देखा जा सकता है. काफी पढ़ी-लिखी महिलाएं आज नई तकनीकों के साथ खेती कर रही हैं और पर्यावरण को संरक्षित करने की कोशिश में लगी हुई है. इसके साथ ही कुछ महिलाओं ने इसे अपना मुख्य व्यवसाय भी बनाया है और पर्यावरण को बचाने के साथ ही वो अपना परिवार भी चला रही हैं.

घर के कूड़े से जैविक खाद बना रही महिलाएं

अब तक जितनी भी महिलाएं पर्यावरण लेकर सजग हो गई हैं उनकी कोशिश रहती है कि वो अपनी ओर से पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान दें. ऐसी ही कुछ महिलाएं अपने घरों के कचरे का (खास कर रसोई के कचरे का) इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में कर रही हैं. हालांकि, ये उनकी काफी छोटी कोशिश है, लेकिन अगर यही कोशिश देश की ज्यादातर महिलाएं करने लगे तो देश में प्रदूषण की एक बड़ी बदहाली जिंदगी को सुधारा जा सकता है.

घर में भी करती हैं हरियाली की सुरक्षा

अक्सर आपने कई घरों की बालकनी में पौधे देखे होंगे. इन्हें लगाने में तो पुरुषों का हाथ हो सकता है, लेकिन इनकी ज्यादातर देखभाल महिलाएं ही करती हैं. पर्यावरण को लेकर महिलाओं की जो उत्सुकता है ये आप अपने घर पर ही देख सकते हैं.

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