#DoNotTouchMyClothes, ऐसे अफगानी महिलाएं उठा रही हैं अपने हक की आवाज

अफगानिस्तान की सत्ता पर जब से तालिबान का कब्जा हुआ तब से ही महिलाओं को लेकर लगातार बंदिशे बढ़ती जा रही है. चाहे महिला रिपोर्टर हो या फिर नेता, हर किसी पर नए-नए बंदिशों की जंजीरों का डाला जा रहा है. तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा करते ही ऐलान कर दिया कि अब अफगान में भी लोगों को शरिया कानून का ही पालन करना पड़ेगा.

इसके साथ ही जहां फैशन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है, वहीं महिलाओं को भी बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. हालांकि, अब महिलाएं भी खुद पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ अफगान में आवाज उठाती नजर आ रही हैं. इसी सिलसिले में अफगान की महिलाओं ने सोशल मीडिया पर भी अपना एक मुहिम चलाया है.

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ट्वीटर पर चलाए जा रहे मुहिम #DoNotTouchMyClothes, #AfghanistanCulture और #AfghanWomen हैसटैग के साथ चलाई जा रही इस मुहिम में कई महिलाओं ने हिस्सा लिया है. इन हैसटैग्स के साथ अफगानी महिलाओं ने वहां की पारंपरिक पोशाक के साथ अपनी पुरानी तस्वीरों को शेयर करना शुरू कर दिया है.

बताते चलें कि सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि अफगान की सड़कों पर भी महिलाओं का गुस्सा फूटते हुए देखा जा सकता है. अफगानिस्तान के कई इलाकों में महिलाएं लगातार मोर्चा कर रही हैं. हालाकिं, अब अफगानिस्तान में बैठे तालिबान ने इसपर भी रोक लगा दी है. दरअसल, अफगानिस्तान के नए फरमान के मुताबिक किसी भी मोर्चा को करने से पहले इजाजत लेनी पड़ेगी.

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बताते चलें कि इससे पहले तालिबानके प्रवक्ता ने कहा था, एक महिला मंत्री नहीं बन सकती. महिला का मंत्री बनना ऐसा है, जैसे उसके गले में कोई चीज रख देना, जिसे वो उठा नहीं सकती. उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए. उनका यही काम है.

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